वण्डोली है यही, यहीं पर है समाधि सेनापति की। महातीर्थ की यही वेदिका यही अमर–रेखा स्मृति की एक बार आलोकित कर हा यहीं हुआ था सूर्य अस्त। चला यहीं से तिमिर हो गया अन्धकार–मय जग समस्त आज यहीं इस सिद्ध पीठ पर फूल चढ़ाने आया हूँ। आज यहीं पावन समाधि पर दीप जल...